Haryanvi Jhandu ke majedar chutkule

Mast Haryanvi jokes

 

एक बार क्लास में एक मास्टर बोल्या : बालको नू बताओ , वो कोनसी चीज़ है जो खींचे ते छोटी हो जा है।
झंडू बोल्या : जी बीड़ी ।

एक बार क्लास में एक मैडम बोली : दूध ने दही में बदलन आले जीवाणु का नाम के होवे से।
हरयाणवी बोल्या : मैडम जी यु तो सवाल ही गलत है ।
मैडम बोल्यी : क्यूकर ?
हरयाणवी बोल्या : जी उसने जीवाणु नहीं जामण कया करे।

एक बार चतरू और भरते का रोला हो गया ।
चतरू भरते के मारण भाजे था।
भरते ने अपणे घर में बड़ के और तगाजे ते किवाड़ बंद कर लिए।
चतरू बोल्या : ओ डरपोक , कर लिए ना किवाड़ बंद।
भरता बोल्या : और ये लवा क्यों राखे हैं।

Jhandu ke chutkule

एक बार एक मास्टर बोल्या क्लास में : बताओ बालको, लेट्रिन किस किस के बन रही है ?

झंडू ने छोड़ के सबने हाथ ठा लिया ।

मास्टर बोल्या : रे झंडू , के बात , थारे लेट्रिन कोनी बन री के ।

झंडू बोल्या : ना मास्टर जी, म्हारे तो दाल बन रही है ।


यु जाड्डे का मौसम और धुंद का नज़ारा ।

चाय के दो कप । एक म्हारा और

दूसरा भी म्हारा।

चाय गेल कोई समझौता नहीं लाड़लो।

Haryanvi status haryanvi

Haryanvi Status


जे तन्ने सब कुछ पा लिया , में तो खो के रह लूंगा ।
बस तू राजी रह बावली , में तो रो के रह लूंगा।


बेरण नू बोली : तू तो घणा बद्तमीज़ है।
मखा : Respected मैडम, इसी तीसी कराओ अपणी।


हरियाणा वालो की एक खास आदत होवे है।
कोई भाई सोता होवेगा ना, उसने भी जगा के पूछ लेंगे : हाँ रे भाई सोवे था क ।


अरे भाई : पूरे ना होणे पाए सपने मेरे।
क्यूंकि किसी और के हो गए आपणे मेरे।


लठ गाडण की कोई उम्र ना होती लाड़लो।
गड़े होड़ ने पाडन की भी ना होती, लागे रवो।


रिस्तेदार : और बेटा, क्या चल रहा है।
झंडू : मखा सांस चल रही है। कहते हो तो बंद कर दू इनने भी।


कई बार तो इतनी भुंडी छोरियां के नखरे ठाणे पड़ ज्यावे हैं ।
जिन ने देख के ब्यँदी भैंस का भी काटडू उल्टा चढ़ जा है।

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हरयाणे की तो लुगाई भी बहुत कसूत होवे से भाइयो।

एक बार एक लुगाई दूसरी ते बोली : सुण ए बाहण, तन्ने बेरा है के गांव का सरपंच कोमा में चला गया।

वा बोली : पैसे वाले हैं बाहण , किते भी जा सके हैं। पिछले साल ही तो अमरीका गए थे।

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एक बार एक मास्टर एक गांव में जावे था । कार ले रया था।

रस्ते में उसने देखा एक झोटा बुग्गी पे छोरा बैठा खेत में ते घास लेकर आने लग रया था ।

मास्टर ने पिछाण लिया । झोटा बुग्गी के आगे कार लगाके ।

मास्टर नु बोल्या : अरे छोरे कोई नौकरी काम धंधा कोणी करा जाता। तू झोटा बुग्गी ए चलावेगा के।

छोरा भी पक्का था । नु बोल्या : और तेरे पढ़ाये ओये जहाज़ चलावेंगे ।।


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