तेने अपनी बनाना चाहू सु..

एक गाम के छोरे ने कॉलेज में एक छोरी आच्छी लागन
लाग गयी... आर ड्याकी उस तें अपने दिल की बात
क्यूकर बतावन लाग्या .......

भूल क्यूकर जाऊं तेंने
तेने अपनी बनाना चाहू सु
अपनी बना के तेंने,
"गोबर पथवाना" चाहू सु!
गोबर पाथती तू गजब लागेगी,
तेरी लुगडी सर तें उतर के भाजेगी
तेरा दामण हिलोरे खावेगा,
कई बे गोबर में सना पावेगा
भैंसा की धार तू काढेगी
दूध ताता कर सब ने बांटेगी
सब के जूठे बर्तन तू धोवेगी
रात ने सब तें पाछे तू सोवेगी
तड़के उठ चाकी तू चलावेगी
पीस क चून रोटी तू बनावेगी
दोफारी में ले तासला, ले जा रोटी हाली की
काटे "भरोटा" जुवार का, माने कती न 'काली' सी
सांझी नलका पर ते पानी ल्यावे
तेरे दोघड सर पे चाहू सु..
भूल क्यूकर जाऊं तेंने

तेने अपनी बनाना चाहू सु..

Leave a Reply

Loading...